मध्य प्रदेश तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण
मध्यप्रदेश तीर्थ-स्थान एवं मेला प्राधिकरण भोपाल
मध्यप्रदेश तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण का गठन मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग के आदेश क्रमांक एफ 11-6/2009/30/सं दिनांक 02 मार्च 2012 को संस्कृति विभाग के अंतर्गत किया गया।
मध्यप्रदेश तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण के निम्न उद्देश्य होंगे:-
1. तीर्थ स्थलों की सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन, उनकी उचित व्यवस्था, प्रबंध, पर्यवेक्षण तथा पोषण के उत्तरदायित्वों का निर्वाहन।
2. मध्यप्रदेश के अतिप्रसिद्ध एवं महत्वपूर्ण मेलों की व्यवस्था।
3. मेलों की बहुविध विशिष्टताओं को प्रसारित-प्रचारित करने के लिये विविध आडियो-वीडियो कार्यक्रमों के साथ विभिन्न चैनलों पर उनके प्रसारण और काॅल सेन्टर के संबंध में कार्यवाही।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 13-10-2014 के परिपेक्ष्य में मध्य प्रदेश तीर्थ-स्थान एवं मेला प्राधिकरण का समस्त नियन्त्रण धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग को प्राप्त हुआ है।
मध्य प्रदेश तीर्थ-स्थान एवं मेला प्राधिकरण द्वारा प्रदेश के 112 प्रमुख तीर्थ-स्थल एवं 1370 अति प्रसिद्व मेलों को पंजीबद्व कर लिया गया है।
मध्यप्रदेश तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण द्वारा म.प्र. के तीर्थ स्थलों एवं अतिप्रसिद्व मेलों की उचित व्यवस्था हेतु अनुदान कलेक्टर के माध्यम से उपलब्ध कराया जाकर तीर्थ एवं मेलों के आयोजन/प्रबंधन में सहयोग प्रदान किया जाता है।
प्राधिकरण द्वारा प्रमुख तीर्थ एवं मेलों के उचित प्रबंध हेतु जारी किये गये अनुदान का विवरण वर्षवार निम्नानुसार है:-
क्रमांक वित्तीय वर्ष मेलों की संख्या जारी अनुदान
1 2020-2021 4 60.23
- प्राधिकरण में प्रदेश के प्रमुख 112 तीर्थों को चिह्नित कर पंजीबद्ध किया गया।
- प्रमुख तीर्थों के सत्यापन उपरांत 'हमारे तीर्थ- हमारी आस्था के केन्द्र' नामक पुस्तक का प्रकाशन कार्य प्रस्तावित है।
- प्राधिकरण में प्रदेश के प्रमुख 1370 मेलों को पंजीबद्ध किया गया है। जिनमे से लगभग 1100 मेलो का सत्यापन किया जा चुका है।
- प्रदेश के प्रमुख तीर्थ एवं मेलों पर आधारित मेला पंचाग 2020-21 का आकल्पन व मुद्रण किया गया है।
- मध्यप्रदेश तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण द्वारा प्रदेश के प्रमुख तीर्थ/मेला एवं देवस्थान प्रबंधन से संबंधित शासकीय आदेशों का विधियो के संग्रहण नामक पुस्तक का प्रकाशन कराया गया। जिसकी प्रतियां समस्त आयुक्त, कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार एवं विधायकों को प्रेषित की जा रही हैं।
- जनजातीय लोक देवताओं पर आधारित त्रिवेणी के लोकदेवता नामक पुस्तक का प्रकाशन किया गया। जिसकी प्रतियां प्रचार-प्रसार हेतु समस्त आयुक्त एवं कलेक्टरों को उपलब्घ कराई गईं हैं।
- प्रदेश के समस्त तीर्थों के विकास के संबंध में मार्गदर्शी निर्देश समस्त जिला कलेक्टरों को जारी किये गये है।
- तीर्थों मे लगने वाले मेलों को और अधिक सुप्रबंधित किया जावे इस हेतु दिशानिर्देश प्राधिकरण द्वारा तैयार कर जारी किये गये है।
- प्रदेश में तीर्थ यात्रियों को सस्ते दर पर आवास एंव भोजन की सुविधा हेतु प्राधिकरण में पंजीबद्ध तीर्थों पर तीर्थ यात्री सेवा सदन/तीर्थ यात्री विश्राम गृह का निर्माण कराया जा रहा जिनमें ओरछा, शिवपुरी, नलखेड़ा में कार्य प्रगति पर है।
- दतिया में तीर्थ यात्री सेवा सदन का कार्य पूर्ण हो चुका है।
- नर्मदा किनारे के तीर्थों पर नर्मदा परिक्रमा यात्रियों की सुविधा हेतु (आवास/अल्प विश्राम) नर्मदा परिक्रम पथ में सुविधा केन्द्र के निर्माण का प्रस्ताव है, संख्या 09।
- करीला माता मंदिर अशोकनगर में विद्युत व्यवस्था हेतु सौर ऊर्जा प्लाट लगवाया गया। ताकि पर्यावरण सरंक्षण हो सके।
- निर्माणाधीन तीर्थ यात्री सेवा सदन में वाटर हार्वेस्टिंग, नक्षत्र वाटिका, जैविक खाद, जल सरंक्षण एवं पर्यावरण संर्वद्धन को आध्यात्मिक परम्परा से जोड़ा जा रहा है।
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